बिल गेट्स पर आधारित नेटफ्लिक्स डॉक्युमेंट्री सीरीज इनसाइड बिल्स ब्रेन की समीक्षा

इनसाइड बिल्स ब्रेन’ का पहला ही दृश्य आपको खटकता है. यहां पर आप जज़मेंटल होते हुए यह तक सोच सकते हैं कि माना बिल गेट्स दुनिया के दूसरे सबसे अमीर आदमी हैं लेकिन क्या अब उन पर बनी डॉक्युमेंट्री में उनके बाथरूम के दृश्य भी देखने पड़ेंगे? लेकिन आगे सीरीज न सिर्फ इस दृश्य के मायने समझाती है बल्कि इसके बहाने दुनिया के एक हिस्से की कड़वी सच्चाई से भी आपको रूबरू करवाती है. इसलिए इसे देखते हुए पहली सलाह यह रहेगी कि जज़मेंटल होने से बचें और थोड़ा धैर्य बरतें! इसलिए कि यहां पर बिल गेट्स के बारे में सबकुछ भले न हो, लेकिन बहुत कुछ ऐसा ज़रूर है जिसे आपको जानना चाहिए.

‘इनसाइड बिल्स ब्रेन’ नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई तीन पार्ट की एक लिमिटेड सीरीज है जो बिल गेट्स के जीवन के अलग-अलग पहलुओं और पड़ावों के किस्से उन्हीं की जुबानी बताती है. इसका पहला एपिसोड बिल गेट्स के बचपन, उनकी रुचियों, उनके परिवार और खासकर मां से उनके संबंधो के बारे में बात करता है. इसके समांतर ही यहां पर माइक्रोसॉफ्ट के बाद बिल गेट्स की ज़िंदगी की झलक और ‘द बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन’ की शुरूआत का जिक्र भी है.

इस एपिसोड में फाउंडेशन द्वारा दक्षिण अफ्रीका के कई इलाकों में चलाए जा रहे मिशन के बारे में तफसील से बताया गया है जिसका उद्देश्य वहां के सबसे पिछड़े लोगों को शौचालय और जीवन की बाकी जरूरी सुविधाएं मुहैया करवाना है. इसके चलते सीरीज की रफ्तार इतनी कम हो जाती है कि आप इस बात पर चिढ़ने लगते हैं कि सीरीज का नाम ‘इनसाइड बिल्स ब्रेन’ क्यों रखा गया है. लेकिन इस एपिसोड में बिल गेट्स की बहनों, पत्नी मेलिंडा और उनके कुछ साथियों द्वारा कही गई कुछ रोचक बातों के साथ गेट्स की कुछ ऐसी भावुक करने वाली बातें भी शामिल हैं, जो इसे सार्थकता दे देती हैं.

सीरीज के दूसरे एपिसोड में बिल गेट्स की टीनएज लाइफ और माइक्रोसॉफ्ट के बनने के पहले और बाद की कहानी देखने को मिलती है. इसमें बिल गेट्स के करीबी दोस्तों जैसे केंट एवंस और पॉल एलन (माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर) से जुड़े कुछ किस्से हैं और इनसे गेट्स का जुड़ाव दिल छूने वाला है. यहां पर माइक्रोसॉफ्ट के लिए गेट्स का जुनून दिखाने के समांतर सीरीज नाइजीरिया में उनके फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे पोलियो अभियान के बारे में भी बात करती रहती है और इस पर ढेर सारा वक्त भी खर्च करती है. और, एक बार फिर आपको लगता है कि इसका मुख्य उद्देश्य फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में जानकारी देना है. पहले एपिसोड में जहां सीरीज बिल गेट्स के पिता को पूरी तरह नज़रअंदाज कर देती है, वहीं दूसरे हिस्से में हॉवर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े उनके समय के बारे में कुछ ऊपर-ऊपर की बातें कर धीमें से आगे बढ़ जाती है.

‘इनसाइड बिल्स ब्रेन’ का आखिरी एपिसोड अपने टाइटल को अधिकतम मात्रा में सार्थक करता है. इस हिस्से में बिल गेट्स और उनकी पत्नी मेलिंडा गेट्स की प्रेम कहानी के समांतर बिल गेट्स के न्यूक्लियर एनर्जी में कुछ क्रांतिकारी कर गुजरने के प्रयासों की झलक मिलती है. साथ ही यह एपिसोड, एक समय पर माइक्रोसॉफ्ट के सामने आई कानूनी मुश्किलों की झलक भी दिखाता है. इसके अलावा यह अमेरिका और चीन के बीच चल रही राजनीतिक-आर्थिक खींचतान के चलते बंद हुए प्रोजेक्ट्स के बारे में भी बात करता है. हालांकि यहां पर भी कोई बात बहुत गहराई में जाकर बताई समझाई नहीं गई है लेकिन फिर भी इनके बहाने बड़े सटीक तरीके से दिखाया गया है कि जनकल्याण और पर्यावरण के लिए किए जा रहे मानवीय प्रयासों पर राजनीति कैसे पानी फेर देती है.

एक मौके पर, यह सवाल पूछे जाने पर कि बिल गेट्स के दिमाग में क्या चलता है, मेलिंडा गेट्स खिलखिलाते हुए कहती हैं – केओस! यह एक शब्द इस सीरीज की समीक्षा के लिए भी काफी कहा जा सकता है. इस बात के लिए ‘इनसाइड बिल्स ब्रेन’ की तारीफ की जा सकती है कि बिल गेट्स की कहानी यहां पर कई परतों में दिखाई गई है लेकिन बेतरतीब होने के चलते इनका असर जरा कम ही हो पाया है. मसलन, पहले एपिसोड में जहां माइक्रोसॉफ्ट को एकदम किनारे कर दिया गया है, वहीं दूसरे और तीसरे में इसके बारे में पूरी तवज्जो के साथ बात की गई है. लेकिन यह कुछ इस तरह से है कि पहले एपिसोड की बहुत सी बातें आपको दूसरे और तीसरे एपिसोड्स देखने के बाद ही समझ में आती हैं. इसके अलावा ‘बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन’ के मिशनों को बिल गेट्स की सोच, उनके तरीके और उनके दर्शन से ज्यादा तरजीह दिया जाना भी अखरता है.

‘एन इनकन्विनिएंट ट्रुथ,’ ‘द रोड वी हैव ट्रैवल्ड,’ ‘ही नेम्ड मी मलाला’ सहित कई बेहतरीन डॉक्युमेंट्री सीरीज रचने वाले ऑस्कर विजेता डेविस गगेनहाइम ने ‘इनसाइड बिल्स ब्रेन’ का निर्देशन किया है. उनकी इस डॉक्यु-सीरीज में कई कमियां हैं लेकिन फिर भी गगेनहाइम और बिल गेट्स की बातचीत आपको खासा प्रभावित और प्रेरित करती है. इसके अलावा सीरीज में गेट्स की कुछ बेहद खास और निजी बातों का जिक्र भी इसे वजन दे देता है. उदाहरण के लिए, एक मौके पर बिल गेट्स कहते हैं कि वे वीकेंड या वैकेशन में विश्वास नहीं करते हैं, वहीं दूसरी तरफ वे ‘थिंक वीक्स’ रखते हैं. इस वक्त को वे रोजमर्रा के कामों से ब्रेक लेकर किताबें पढ़ने और नए आइडिया सोचने के लिए इस्तेमाल करते हैं. कुल मिलाकर, ‘इनसाइड बिल्स ब्रेन’ बिल गेट्स के सबसे ताकतवर, सबसे असहाय और सबसे सामान्य पलों का एक पूरा ढेर आपके सामने लगा देती है. लेकिन इनसे क्या, कितना और कैसे लेना है, यह आपकी जिम्मेदारी है.

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